राजस्थान के झुंझुनू जिले में अरावली की सुरम्य एवं पावन वादियों में स्थित तीर्थराज लोहार्गल चिरंजीवी भगवान श्री परशुराम जी की तपोस्थली के रूप में श्रद्धा का केंद्र माना जाता है।
अष्टलक्ष्मी परशुराम फाउंडेशन का भाव है कि इस पवित्र क्षेत्र में भगवान श्री परशुराम जी की 108 फीट ऊँची विराट एवं भव्य प्रतिमा स्थापित हो और लोहार्गल की यह पुण्यभूमि भगवान परशुराम के तप, त्याग, शौर्य, ज्ञान और धर्म-संकल्प के एक भव्य प्रेरणा-केंद्र के रूप में विकसित हो।
अष्टलक्ष्मी की भावना को अष्टधातु की दिव्यता से जोड़ते हुए यह प्रतिमा भारतीय संस्कृति और भगवान परशुराम के कालजयी आदर्शों का प्रतीक बने।
हमारा उद्देश्य लोहार्गल क्षेत्र को भव्य, सुव्यवस्थित एवं विश्वस्तरीय सनातन आस्था-केंद्र के रूप में विकसित करना है। इस विराट संकल्प को मूर्त रूप देने के लिए फाउंडेशन द्वारा विशेषज्ञ इंजीनियरों, वास्तुविदों एवं तकनीकी विशेषज्ञों की टीम के माध्यम से संभावित स्थल का सर्वेक्षण तथा Technical & Feasibility Study कराने की दिशा में प्रक्रिया प्रारंभ की जाएगी।
इन सभी विषयों में संबंधित सक्षम विभागों से नियमानुसार कार्यवाही आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। लोहार्गल क्षेत्र अथवा अन्य उपयुक्त पवित्र स्थल पर इस संकल्प को साकार करने की संभावनाओं पर कार्य किया जाएगा।
हम सहायता लेने वाला समाज नहीं, एक-दूसरे को सक्षम बनाने वाला समाज बनाना चाहते हैं। सक्षम व्यक्ति से समर्थ परिवार, समर्थ परिवार से सशक्त समाज और सशक्त समाज से समृद्ध राष्ट्र तक।